What To Do After a Failed IVF Cycle? -Candor IVF Center


IVF Cycle  के फ़ैल होने के बाद, एक कपल्स को आगे कोनसा उत्तम स्टेप लेन चाहिए?

IVF Cycle के फ़ैल होने के बाद, अक्सर कपल्स ज्यादा हताश हो जाते है, ज्यादा पैनिक हो जाते है, और कुछ कपल्स अपना मानसिक स्थिरता भी थोड़ी गवा देते है।

सबसे पहले, ये जान ले की IVF Cycle का सफलता दर 100% नहीं है।  कोई भी ऐसी फर्टिलिटी ट्रीटमेंट नहीं है जो आपको 100% परिणाम दे।

यही अंतर है Natural Conceiving Process में & Assisted Reproductive Treatment में।

IVF Cycle को सबसे अच्छे समझना जरुरी है।  की उसमे जो हम जो स्टेपस करते है वो प्राकृतिक प्रेगनेंसी के विकल्प वाले स्टेप्स होते है यानि जो प्राकृतिक तोर पे अंडकोष और शुक्राणु का मिलान नाली के अंदर होता है। भ्रूण बनना,  इसके पाचवे दीन गर्भाशय के नाली से खिसक के गर्भाशय में आना, गर्भाशय की दीवाल में  फलित होना।

इन सब स्टेप्स को लेबोरेटरी में करते है।  एकबार भ्रूण स्थान्तर के बाद, उस भ्रूण का गर्भाशय की दीवाल में फलित होना, पूरी तरह से प्राकृतिक प्रेगनेंसी की तरह होता है।

यदि कोई कपल 1 महीने के लिए प्रयत्न करते है तो उसका सफलता दर 7-8% होता है, वैसे एक IVF साइकिल का सफलता दर 50-60% होता है।   कोई भी IVF स्पेशलिस्ट 100% सफलता दर मिले ऐसा नहीं के सकता, है वो आपको सफलता (Conceive होने) की संभावना बढ़ा सकते है।

IVF प्रक्रिया क्यों फ़ैल होती है?

ये समझने के लिए एक खेती का उदाहरण लेते है।  अच्छे पोथे को उगाने के वजय होती है, अच्छी मिटटी और अच्छे बीज का होना।

इसी तरह IVF में पॉजिटिव परिणाम के लिए, सबसे जरुरी होता है अच्छा Endometrio होना गर्भाशय की जो दीवाल होती है और दूसरा अच्छा भ्रूण (Embryo) होना।  अगर ये दो चीज़ अच्छी गुणवत्ता के है तो आपका सफलता दर बढ़ सकता है।

IVF साइकिल के फ़ैल होने की वजय उन्ही दो चीज़ो में कही न कही खामी या कम गुणवत्ता होती है।  जिसकी वजय से वो फ़ैल हो जाती है।  

जभी भी एक IVF साइकिल फ़ैल हो तो, हताश मत होय, और आपने IVF Consultant से बात करिये ।

क्युकी है एक साइकिल डॉक्टर के नजर से फ़ैल नहीं होती, हर एक साइकिल के स्टडी के बाद कुछ न कुछ पता चलता है की किस स्टेप में आपको प्रॉब्लम हुयी और उसको सही कर सकते है।

स्टडी में डॉक्टर आपका डेटा स्टडी, क्लीनिकल स्टडी और लेबोरेटरी स्टडी करते है। ये सब हेल्प करते है आगे की साइकिल प्लान करने में।

कही बार किसी महिला की 3 पुनरावृत्त  साईकल फ़ैल हो जाती है, उसको मेडिकल लैंग्वेज में  Recurrent Implantation Failure कहा जाता है।  की बार बार भ्रूण गर्भाशय के अंदर रखने के बाद भी परिणाम नहीं मिलता क्युकी उसके लिए बहोत सारे फ़ैक्टर जिम्मेदार होते है।  ऐसे केस में एक IVF स्पेशलिस्ट डॉक्टर का परामर्श लेना अनिवार्य है।

IVF विफलता के लिए जिम्मेदार कारक

  •  Poor Endometrium

           जो गर्भाशय के अंदर की दीवाले है उसकी गुणवत्ता मैं कमी होना।  कही बार डॉक्टर गर्भशाय के अंदर दूरबीन उतार के आपका टेस्ट करते है।  देखा जाता है की गर्भाशय की दीवाल केसी है उसको काटने की जरुरत है, या अंदर                कोई झिल्ली या पर्दा  है जिसको हटाने की ज़रूरत है।

            उसके बाद दूसरा एक टेस्ट किया जाता है जिसको Endometrial Receptivity Analysis (ERA) कहा जाता है।  जिससे पता चलता है किस दिनों के दरमियान भ्रूण अंदर रख सकते है।

  •  Embryo Quality

           कही बार Recurrent Implantation Failure  मैं होता है की महिला के अंडे की गुणवता  अच्छी नहीं होती।  तो ऐसे कैसे में आपको डोनर अंडे के लिए सलाह दी जाती है।

  •  Sperm Quality

           कही बार स्पर्म की गुणवत्ता भी एक कारक हो सकता है।  इस केस में स्पर्म की गुणवत्ता, मोर्टेलिटी टेस्ट किये जाते है।

            अगर अच्छी गुणवत्ता के  एंडोमेट्रिटिस, अंडे और स्पर्म हो तो आगे की IVF साईकल के लिए प्रयत्न करना चाहिए क्युकी की कही बार नसीब भी कही बार काम करता है।

Read more about why IVF fail & Reason Of IVF Failure

जैसे 100% परिणाम पहली ही साईकल मैं नहीं देता पर अक्सर देखा गया है की दूसरी, तीसरी या चौथी साईकल मैं 90 % तक पोहच सकते है।  क्युकी 4 साईकल तक तो बहोत ही ऐसा स्टडी कर लिया होता है की जिस से ठीक तरीके से मालूम पड़ता है की कहा पर दिक्कत है।

किसी भी ट्रीटमेंट साईकल के फ़ैल होने पे एक बात का ध्यान रखिये की, इनफर्टिलिटी की ट्रीटमेंट एक बीमारी नहीं है।  वो एक सहायक स्टेप्स है एक रिप्रोडक्टिव मेडिसिन मैं हेल्प किया जाता है ताकि महिला गर्भ धारण कर सके ।

बच्चा न रह पाना कोई  बीमारी का नाम नहीं है, तो उस चीज़ को ज्यादा सोच के मानसिक रूप से परेशान न होये।  आपका Positive Attitude बहोत ज़रूरी है IVF Cycle के सफलता के लिए।  आपका Stable Mindset बहोज़ जरुरी है।  दवाओं का टाइम पे लेना बहोत ज़रूरी है ।  बाकि गुणवत्ता एक महत्त्व फैक्टर होता है।

 

 

 

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